हिंदी कविता

वो होंठ तेरे कानों………..

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वो होंठ तेरे कानों
पर धरे कुछ सुना गए
वो गीत तेरे, मेरे अधर
गुनगुना गए
वो खुशबू तेरी रगों में
मेरी लोट गई
वो जुल्फ तेरी
मेरी पेशानी उलझा गई
वो सांसें मेरी दर्द से
तारी हो गईं
वो बलाएं तेरी
मुट्ठी में मेरी समा गईं
तेरी जान का सदक़ा
हम अपनी उम्र पे वार आये
क्या होगा तुम्हें
ज़रा ये तो बताओ
जब अपनी [...]

मुझे बार-बार तोड़ना………..

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तुम्हारी चोट सेमेरा दरकना लाज़मी तो नहीं,
मगरकुछ बातें मेरे इख्तियार में भी नहीं,
मुझे बार-बार तोड़ना, फिर जोड़ना,
प्रिय शगल है तुम्हारा, स्वामित्व का बोध कराता है|
तुम सिर्फ मेरी हो पुख्ता अहसास दिलाता है,
मैं तुम्हें खुश होने देती हूँ,
इसलिए नहीं, कि मैं निर्बल हूँ,
इसलिए! क्योंकि,
मैं टूटी तो तुम बिखर जाओगे,
ख़ुद को अपने चारों ओर [...]

उसकी स्त्री गमछे में बच्चे को………

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खनिज-कोयला-जंगल के देश में
मांदल नगाड़ा बजाता
तमाखू खाता
गुज़रता है तुफू सोरेन
गाता-
‘पहाड़ तोड़ने से अच्छा है
पहाड़ बन जाना’
उसकी स्त्री
गमछे में बच्चे को
पीठ पर लटकाकर
बीनती है चटाई
जो पहुँच जाती है
इन्द्रप्रस्थ की सड़कों पर
उसकी बहन के साथ बिकने को |
तीर धनुष से
खेलता
उसका बच्चा
मार गिराता है मोर को
ख़ुश है तुफू सोरेन
पेट भरेगा आज !
अगले दिन बच्चा
बन्दूक पकड़
तैयारी [...]

हवास नसीब नज़र को कहीं करार नहीं……….

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हवास नसीब नज़र को कहीं करार नहीं
मैं मुन्तज़र होऊं , मगर तेरा इंतज़ार नहीं ,
हमीं से रंग – इ – गुलिस्तान , हमीं से रंग – इ – बहार
हमीं को नज़्म – इ – गुलिस्तान [...]

दिल को कोई बे यकीन है मुहब्बत में ………..

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वो  बोली , दिल  को  कोई  बे यकीन  है  मुहब्बत  में
मै  बोला , ठीक  है  पैर  इश्क   तो  ईमान  होता  है
वो  बोली , अर्ज़ें  दिल  के  अन्दर  बैन  करती  है
मै   बोला , ठीक  है  मुझ  को  सुनाई  देते  रहेते  हैं
वो  बोली , हम  तो  जैसे  एक  मुसलसिल  दुःख  के  कैदी  [...]

न जाने क्या खता हुई हमसे

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तनहा छोड़ के चल दिए जाने क्यूँ ,
दिल के तुकडे हजार किये जाने क्यूँ
न जाने क्या खता हुई हमसे
दिया प्यार का ये सिला जाने क्यूँ ,
नादान दिल मदहोश हुआ नशा ये प्यार में ,
कुछ होश ना रहा जाने क्यूँ ,
सारे चिताएं जला दी अरमानो कि ,
पर तस्वीर दिल से ना मिटा पाए [...]

द बेस्ट

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पर्वत की चोटी पर झूमता हुआ विशाल वृक्ष नही बन सकते
तो घाटी में खड़ा छोटा पौधा ही बन जाओ ,परन्तु बनो .
पर्वत की विशाल सतह से चिपकी छोटी सुंदर बेल ,
पौधा नही बन सकते तो बेल ही बन जाओ ,परन्तु बनो .
तना नही बन सकते हो तो शाखा ही बन जाओ
किंतु ऐसी [...]

बात

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कोइ और तरह की बात करो
दिल जिस से सबका संभाल जाए
किसी और ख्याल में ढल जाए
बाई मुसरफ दिन के आखिर पर
ये ढलती शाम संभल जाए
इस सख्त [...]

ये पत्नी के पूज्य पिताजी कैसे तुमको लिखूं नमस्ते

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हे पत्नी के पूज्य पिताजी कैसे तुमको लिखूं नमस्ते
उल्टा सीधा किया आपने मुझको अच्छा उल्लू फाँसा
कह सोने चाँदी के बर्तन दे डाला सब पीतल काँसा
सिक्के जितने दिए दान में एक-२ सब निकले खोटे
रजत थाल फौलादी निकली अलमुनियम के निकले लोटे
घडी पुराने आदम युग की दिनभर जो चाभी ही खाती
जिसे देखकर बिना बताये [...]

प्यार का नाटक रचाकर

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गरीबी से तंग आकर
प्यार का नाटक रचाकर
गाँव के एक नवयुवक ने
गाँव से एक लड़की भगाई
वह स्वभाव से थी रसमलाई
उसे बेचने वह ले गया दिल्ली
रास्ते में दरोगा जी टकराए
वे दोनों सकपकाए,पाँव पकड़ गिड़गिडाये
दरोगा ने उनकी एक न सुनी उल्टे कहा-
तुम साले ऐसे काम करते हो
ऊपर वाले से नही डरते हो
ना जाने किस बहाने [...]